अपने पीछे पडे भूखे गिद्ध से प्राण बचाने के लिए एक कपोत (कबूतर) शिबी राजा की शरण में आया । उस कपोत के प्राण बचाने के लिए गिद्ध को स्वयं की जांघ का मांस काटकर देने से शिबी राजा अमर हो गए । राक्षसों के नाश के लिए आवश्यक शस्त्र बनाने के लिए देवताओं को अपनी हड्डियां देकर दधीचि ऋषि विश्व के लिए वंदनीय बन गए । इन महान व्यक्तियों के समान ही सृष्टि का प्रत्येक घटक त्याग करता है । सभी प्राणिमात्र और वनस्पतियों को प्रकाश तथा जीवन देने के लिए सूर्यदेवता सदैव कार्यरत रहते हैं । नदी सभी को पानी देते हुए बहती है; इसलिए लोग उसे पवित्र मानते हैं । इसके विपरीत, कुंए का पानी बहता नहीं तथा सूख जाता है । संग्रह करने से मनुष्य संकीर्ण वृत्ति का हो जाता है और त्याग करने से वृत्ति उदार बनती है । इसलिए ‘त्याग में ही खरा आनंद है’, यह ध्यान में रखें!
आइए, त्याग की सीख देनेवाली महान हिंदु संस्कृति, पराक्रमीराजा तथा तपस्वी ऋषि-मुनियों के चरणों में हम शीश झुकाएं !
हिन्दू संस्कृति के अनुसार वस्त्र परिधान करें !
पाठ्य पुस्तक में होनेवाली प्रतिज्ञाओं को आचरण में लाएं !
‘हैरी पॉटर’ नही, अपितु हिंदु राजाओं, राष्ट्रपुरुषों एवं क्रांतिकारियों की जीवनी की कथाएं पढें !
अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम बढाने के लिए यह करें !
भारत माता की रक्षा के लिए विद्यार्थी बंधुओं स्वयं को सिद्ध करें !
‘फ्रेंडशिप डे’ समान पाश्चात्त्य विकृति पर बलि न चढे !